घिस्सुपुरा में डेढ़ साल से बदहाल सड़क, शिकायतों के बावजूद नहीं जागे जिम्मेदार अधिकारी
(रिपोर्ट: गुलज़ार अहमद)- जल जीवन मिशन के बाद खोदी गई सड़क आज भी गड्ढों में तब्दील, ग्रामीणों ने धरना देकर जताया विरोध; बोले—आश्वासन नहीं, अब चाहिए सड़क की मरम्मत
- By गुलज़ार अहमद --
- Tuesday, 22 Sep, 2026
Global Star News
घिस्सुपुरा, हरिद्वार। ग्राम पंचायत धनपुरा के गांव घिस्सुपुरा में सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों में लगातार नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन डालने के लिए करीब डेढ़ साल पहले सड़क की खुदाई की गई थी, लेकिन पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़क की अब तक सही तरीके से मरम्मत नहीं कराई गई।
ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों को कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद खराब रास्ते की ओर कोई ठोस ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे होने के कारण ग्रामीणों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वोट के समय हाथ जोड़ने वाले जनप्रतिनिधि अब कहां?
सड़क की बदहाली से नाराज ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान “वोट के वक्त हाथ जोड़े, अब जनता गड्ढों में रोए” और “सांसद, विधायक, जिला पंचायत प्रधान—सब गहरी नींद में सोए” जैसे नारों और तख्तियों के जरिए अपना आक्रोश जताया।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब किसी सरकारी योजना के तहत सड़क खोदी जाती है तो कार्य पूरा होने के बाद सड़क को पूर्व स्थिति में लाने की जिम्मेदारी किसकी है? यदि सड़क की मरम्मत नहीं कराई जाती है तो इसका खामियाजा आखिर आम जनता क्यों भुगते?

बार-बार शिकायत, फिर भी कार्रवाई का इंतजार
ग्रामीणों के अनुसार खराब सड़क को लेकर संबंधित अधिकारियों को कई बार सूचना दी गई है। इसके बावजूद अभी तक सड़क की स्थायी मरम्मत के लिए कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतें और आश्वासन लगातार मिल रहे हैं, लेकिन सड़क की स्थिति जस की तस बनी हुई है। उनका कहना है कि अब उन्हें आश्वासन नहीं बल्कि मौके पर काम शुरू होने की जरूरत है।
बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए बनी परेशानी
सड़क पर बने गड्ढों के कारण पैदल चलने वालों, दोपहिया वाहन चालकों और स्कूली बच्चों को परेशानी हो रही है। ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से समस्या और गंभीर हो जाती है।
बुजुर्गों और मरीजों को आने-जाने में भी दिक्कत होती है। ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल ले जाने के दौरान खराब सड़क बड़ी परेशानी बन सकती है।

तेज धूप में ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे मौ सलीम
सड़क की समस्या को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मौ सलीम ग्रामीणों के साथ तेज धूप में सड़क पर धरने पर बैठे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से इस समस्या को झेल रहे हैं और संबंधित अधिकारियों को कई बार मामले से अवगत कराया जा चुका है।
मौ सलीम ने कहा कि ग्रामीणों की मांग किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और चलने योग्य सड़क की है। उन्होंने कहा कि डेढ़ साल का समय कम नहीं होता। यदि सड़क की मरम्मत के लिए संबंधित विभाग जिम्मेदार है तो उसे ग्रामीणों की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “जागो जनप्रतिनिधियो, जागो! धनपुरा की यह बदहाली देखो। ग्रामीण करीब डेढ़ साल से खराब रास्ते की परेशानी झेल रहे हैं। अधिकारियों को कई बार अवगत कराने के बावजूद यदि समस्या का समाधान नहीं होता तो यह गंभीर चिंता का विषय है। अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, सड़क की स्थायी मरम्मत करानी होगी।”
ग्रामीणों की मांग—अब समय सीमा तय कर काम शुरू कराया जाए
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से मांग की है कि घिस्सुपुरा की खराब सड़क का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और सड़क की मरम्मत के लिए जिम्मेदार विभाग को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्थिति को लेकर पहले ही कई बार अधिकारियों को बताया जा चुका है। अब प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समस्या केवल कागजों में दर्ज न रहे, बल्कि मौके पर सड़क की मरम्मत का काम दिखाई दे।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे अपनी मांग को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने पर मजबूर होंगे।
ग्रामीणों की सीधी मांग है—डेढ़ साल का इंतजार काफी हुआ, अब सड़क चाहिए।
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ग्रामीणों के 5 सीधे सवाल 1. डेढ़ साल से सड़क खराब है—बार-बार शिकायतों के बावजूद अब तक मरम्मत क्यों नहीं हुई? 2. जल जीवन मिशन के तहत सड़क खोदी गई थी, तो सड़क को पूर्व स्थिति में बहाल करने की जिम्मेदारी किस विभाग की है? 3. क्या संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण कर सड़क की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट तैयार करेंगे? 4. बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को रोज परेशानी हो रही है—आखिर उनकी सुरक्षा और आवागमन की जिम्मेदारी कौन लेगा? 5. अब आश्वासन नहीं—क्या प्रशासन सड़क की मरम्मत के लिए जिम्मेदार विभाग को समय-सीमा तय करके तत्काल काम शुरू कराने के निर्देश देगा?





