Global Star News
(रिपोर्ट: गुलज़ार अहमद)- हरिद्वार। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के ऋषिकुल राजकीय आयुर्वेद कॉलेज में BAMS इंटर्न डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। छात्रों की प्रमुख मांग है कि उन्हें भी MBBS इंटर्न डॉक्टरों के समान ₹25,000 प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाए।
यह आंदोलन अब केवल ऋषिकुल परिसर तक सीमित नहीं है। हरिद्वार के गुरुकुल परिसर और देहरादून के हर्रावाला स्थित विश्वविद्यालय मुख्य परिसर में भी छात्र समान मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। तीनों परिसरों के छात्र इस मांग को लेकर एकजुट नजर आ रहे हैं।
₹15 हजार बनाम ₹25 हजार पर छात्रों ने उठाए सवाल
आंदोलनरत छात्रों के अनुसार, वर्तमान में BAMS इंटर्न डॉक्टरों को ₹15,000 प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है, जबकि MBBS इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹25,000 प्रतिमाह किया गया है। छात्रों का सवाल है कि जब दोनों वर्गों के इंटर्न डॉक्टर अस्पतालों में मरीजों की सेवा और अपनी निर्धारित जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, तो मानदेय में इतना अंतर क्यों रखा गया है?
छात्रों का कहना है कि BAMS इंटर्न डॉक्टर भी अस्पतालों की OPD, IPD और आवश्यक चिकित्सा सेवाओं में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में उनका मानदेय भी समान स्तर पर किया जाना चाहिए।
NCISM के नियम 15(d) का दिया हवाला
आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों ने भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM) के नियम 15(d) का हवाला देते हुए समान स्टाइपेंड की मांग उठाई है। छात्रों का कहना है कि आयुष इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड को लेकर निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप उन्हें भी समान मानदेय दिया जाना चाहिए।
छात्रों ने शासन और सरकार से मांग की है कि मामले में जल्द निर्णय लेते हुए ₹25,000 प्रतिमाह स्टाइपेंड लागू किया जाए।
कई बार ज्ञापन, अब धरने का सहारा
छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांग को लेकर पहले भी संबंधित अधिकारियों को कई बार ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन अभी तक उनकी मांग पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ। उनका कहना है कि लगातार प्रयासों के बाद भी समाधान नहीं होने पर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
ऋषिकुल परिसर में तालाबंदी की चेतावनी भी दी गई है। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।
विश्वविद्यालय ने शासन को भेजी संस्तुति
वहीं, मामले में उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय की ओर से भी शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. शिवकुमार बरनवाल ने आयुष एवं आयुष शिक्षा सचिव को पत्र भेजकर मामले से अवगत कराया है। इसके साथ ऋषिकुल, गुरुकुल और हर्रावाला परिसरों के निदेशकों की रिपोर्ट भी शासन को भेजी गई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रतिमाह किए जाने की संस्तुति शासन से की है।
अब शासन के फैसले पर टिकी छात्रों की नजर
तीनों परिसरों के छात्र अब शासन और सरकार के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि उनकी मांग केवल स्टाइपेंड बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समान जिम्मेदारी के लिए समान मानदेय और आयुष इंटर्न डॉक्टरों के अधिकार से जुड़ा मुद्दा है।
छात्रों का कहना है कि वे मरीजों की सेवा और अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपने अधिकार के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रहे हैं। अब छात्रों की नजर इस बात पर है कि शासन उनकी मांग पर कब तक निर्णय लेता है और ₹25 हजार का स्टाइपेंड कब से लागू किया जाता है।