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जलभराव से सैकड़ों बीघा फसलें बर्बाद होने की कगार पर, किसानों में बढ़ी चिंता

“खेत डूबे, फसलें बर्बादी की कगार पर, प्रशासन कब जागेगा? मौ सलीम ने तत्काल सर्वे और मुआवजे की उठाई मांग”

जलभराव से सैकड़ों बीघा फसलें बर्बाद होने की कगार पर, किसानों में बढ़ी चिंता
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Global Star News 

(रिपोर्ट: गुलज़ार अहमद)-हरिद्वार। जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हरिद्वार ग्रामीण और लक्सर क्षेत्र में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण सैकड़ों बीघा कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। कई स्थानों पर खेतों में कई दिनों से पानी भरा होने के कारण खड़ी धान और गन्ने की फसलें खराब होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। यदि समय रहते पानी की निकासी नहीं कराई गई तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

किसानों की इस गंभीर समस्या को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मौ सलीम ने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसानों ने महीनों तक मेहनत कर फसल तैयार की है और खाद, बीज, सिंचाई व डीजल पर बड़ी रकम खर्च की है। ऐसे में खेतों में लगातार भरा पानी उनकी पूरी मेहनत और लागत को बर्बाद कर सकता है।

प्रशासन तत्काल कराए नुकसान का सर्वे

मौ सलीम ने मांग की कि राजस्व विभाग, कृषि विभाग और संबंधित अधिकारियों की संयुक्त टीमें गठित कर प्रभावित गांवों में तत्काल मौके पर भेजी जाएं। अधिकारियों द्वारा खेत-खेत जाकर फसल क्षति का वास्तविक आकलन किया जाए और उसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाए, ताकि प्रभावित किसानों को समय रहते राहत मिल सके।

उन्होंने कहा कि केवल कागजों में सर्वे या आश्वासन से किसानों की समस्या का समाधान नहीं होगा। प्रशासन को मौके पर पहुंचकर जलभराव की वास्तविक स्थिति और किसानों के नुकसान का जायजा लेना होगा।

मुआवजे में देरी न हो

मौ सलीम ने कहा कि जिन किसानों की फसल जलभराव के कारण प्रभावित हुई है, उन्हें सर्वे के आधार पर नियमानुसार तत्काल आर्थिक सहायता और उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने प्रशासन से यह भी मांग की कि नुकसान का आंकलन करते समय खेत में खड़ी फसल के साथ किसान द्वारा किए गए कृषि निवेश को भी गंभीरता से लिया जाए।

हर साल का जलभराव, आखिर कब होगा स्थायी समाधान?

उन्होंने सवाल उठाया कि बारिश के दौरान हर साल ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की समस्या सामने आती है, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने संबंधित विभागों से नालों और नदियों की सफाई, अवरुद्ध जल निकासी मार्गों को खोलने तथा पर्याप्त और स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था विकसित करने की मांग की।

मौ सलीम ने कहा कि यदि जल निकासी की व्यवस्था समय रहते दुरुस्त कर दी जाए तो किसानों की फसल को होने वाले बड़े नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसलिए प्रशासन को बारिश थमने का इंतजार करने के बजाय तुरंत मशीनरी और कर्मचारियों को प्रभावित क्षेत्रों में उतारकर पानी की निकासी शुरू करानी चाहिए।

जनप्रतिनिधि भी सरकार पर बनाएं दबाव

उन्होंने क्षेत्र के विधायक और सांसद से भी अपील की कि वे प्रभावित किसानों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनें और शासन स्तर पर विशेष राहत पैकेज तथा फसल क्षति के उचित मुआवजे के लिए प्रभावी पैरवी करें।

मौ सलीम ने कहा, “किसान की फसल बर्बाद होना सिर्फ एक व्यक्ति का नुकसान नहीं है, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ता है। इसलिए प्रशासन इस मामले को सामान्य बारिश की समस्या मानकर नजरअंदाज न करे। प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वे, जल निकासी और मुआवजे की कार्रवाई प्राथमिकता के आधार पर की जानी चाहिए।”

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते जल निकासी नहीं कराई गई और फसल क्षति का आकलन नहीं हुआ तो नुकसान लगातार बढ़ता जाएगा। ऐसे में जिला प्रशासन को बिना किसी देरी के मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू करनी चाहिए, ताकि किसानों को राहत मिल सके और उनकी महीनों की मेहनत पूरी तरह बर्बाद होने से बचाई जा सके।

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1. तत्काल खेत-खेत सर्वे कराया जाए — राजस्व 
एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर फसल 
क्षति का वास्तविक आकलन करे।

2. 24 घंटे में जल निकासी शुरू हो — प्रभावित खेतों से पानी निकालने के लिए पंप, मशीनरी और संबंधित विभागों की टीम तत्काल लगाई जाए।

3. क्षतिग्रस्त फसलों का उचित मुआवजा मिले — सर्वे रिपोर्ट के आधार पर पात्र किसानों को बिना अनावश्यक देरी के राहत एवं मुआवजा दिया जाए।

4. जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही तय हो — जल निकासी व्यवस्था में लापरवाही और नालों की सफाई में देरी की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।

5.जलभराव का स्थायी समाधान हो — नालों की सफाई, अतिक्रमण/अवरोध हटाने और स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था का समयबद्ध कार्ययोजना के साथ समाधान किया जाए।

“सिर्फ सर्वे नहीं—मौके पर कार्रवाई चाहिए, किसान को 
राहत और जलभराव का स्थायी समाधान चाहिए!”
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