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करोड़ों के फंड के बावजूद बदहाल काठा पीर दरगाह, बारिश में टपक रही छतें

जायरीनों की सुविधाओं पर उठे सवाल, एसडीएम लक्सर से तत्काल मरम्मत और व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने की मांग

करोड़ों के फंड के बावजूद बदहाल काठा पीर दरगाह, बारिश में टपक रही छतें
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Global Star News 

(रिपोर्ट:गुलज़ार अहमद)- हरिद्वार ग्रामीण/लक्सर। उत्तराखंड की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल और लाखों लोगों की आस्था का केंद्र शाह मोहम्मद शाह काठा पीर दरगाह इन दिनों बुनियादी सुविधाओं और रखरखाव के अभाव से जूझ रही है। बारिश के मौसम में दरगाह परिसर और मुसाफिरखानों की कई छतों से पानी टपकने तथा दीवारों में सीलन की समस्या सामने आ रही है। दूर-दराज से आने वाले जायरीनों को बारिश के दौरान काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।

सबसे गंभीर सवाल यह है कि दरगाह के पास पर्याप्त फंड उपलब्ध होने की बात कही जा रही है, इसके बावजूद जरूरी मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं का काम समय रहते क्यों नहीं कराया गया? यदि फंड उपलब्ध है तो उसका उपयोग जायरीनों की सुविधा और दरगाह की आवश्यक मरम्मत में होना चाहिए।

बारिश में टपक रही छतें, कमरों में सीलन

बरसात के दौरान दरगाह परिसर की कई इमारतों की स्थिति चिंताजनक दिखाई दे रही है। मुख्य मजार शरीफ सहित आसपास के भवनों की छतों से पानी रिसने की शिकायत है। मुसाफिरखानों के कई कमरों में भी बारिश का पानी टपक रहा है।

कई स्थानों पर दीवारों में सीलन है, कहीं पलस्तर खराब हो चुका है तो कुछ जगहों पर फर्श भी क्षतिग्रस्त दिखाई देता है। लगातार नमी के कारण भवनों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।

ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे जरूरी सवाल यही है कि जब दरगाह में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचते हैं और फंड की उपलब्धता की बात सामने आ रही है, तो बरसात से पहले छतों की मरम्मत और वाटरप्रूफिंग का काम क्यों नहीं कराया गया?

हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन के पास है व्यवस्था की जिम्मेदारी

बताया जाता है कि काठा पीर दरगाह की व्यवस्था को लेकर पूर्व में विवाद सामने आया था, जिसके बाद मामला नैनीताल हाईकोर्ट तक पहुंचा। अदालत के आदेश के अनुसार विवाद का स्थायी समाधान होने तक उर्स, मेले और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी एसडीएम लक्सर के पास है।

ऐसे में दरगाह की मौजूदा स्थिति सीधे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। सामाजिक कार्यकर्ता मौ. सलीम ने मांग की है कि एसडीएम लक्सर स्वयं मौके का निरीक्षण कर दरगाह की वास्तविक स्थिति का जायजा लें और आवश्यक कार्यों के लिए तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें।

फंड उपलब्ध होने के बावजूद सुविधाओं का अभाव क्यों?

मौ. सलीम का कहना है कि काठा पीर दरगाह में हर साल बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचते हैं। ऐसे धार्मिक एवं आस्था के केंद्र पर आने वाले लोगों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि दरगाह के पास करोड़ों रुपये का फंड उपलब्ध है, तो नियमानुसार उसका उपयोग मरम्मत, रखरखाव, स्वच्छता, पेयजल, शौचालय, मुसाफिरखाना और अन्य जनसुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जाना चाहिए।

करीब 10 बीघा जमीन में बढ़ती भीड़ के लिए जगह पड़ रही कम

मौ. सलीम ने दरगाह की जमीन को लेकर भी महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि काठा पीर दरगाह में विभिन्न समुदायों के लोग बड़ी संख्या में आस्था के साथ पहुंचते हैं। विशेषकर उर्स और मेले के दौरान जायरीनों की संख्या काफी बढ़ जाती है।

उनके अनुसार दरगाह के पास उपलब्ध जमीन सीमित होने के कारण बड़े आयोजनों के दौरान आसपास की जमीन किराए पर लेने की आवश्यकता पड़ती है, जिससे हर वर्ष बड़ी धनराशि खर्च होती है।

उनका कहना है कि यदि नियमों के तहत दरगाह के पास अतिरिक्त जमीन उपलब्ध कराई या खरीदी जा सके तो भविष्य में स्थायी मुसाफिरखाना, लंगर भवन, पार्किंग, शौचालय और अन्य जनसुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे हर साल अस्थायी रूप से जमीन किराए पर लेने की आवश्यकता भी कम हो सकती है।

दरगाह की जमीन और फंड को लेकर पारदर्शिता की मांग

सामाजिक कार्यकर्ता ने मांग की है कि दरगाह से संबंधित फंड, आय और व्यय का अधिकृत एवं नियमसम्मत विवरण सार्वजनिक किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं और आम लोगों के सामने पूरी पारदर्शिता बनी रहे।

उन्होंने कहा कि यदि दरगाह के पास पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है तो उसका प्राथमिक उपयोग उन कार्यों में होना चाहिए जिनसे सीधे जायरीनों को सुविधा मिले और दरगाह की संपत्ति सुरक्षित रहे।

तत्काल कराए जाएं ये जरूरी काम

मौ. सलीम ने एसडीएम लक्सर और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मौके का निरीक्षण कराया जाए और निम्न कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराए जाएं—

1. टपकती सभी छतों की तत्काल मरम्मत।

2. सभी आवश्यक भवनों में वाटरप्रूफिंग।

3. मुसाफिरखानों की सीलनयुक्त दीवारों की मरम्मत और पलस्तर।

4. क्षतिग्रस्त फर्श की मरम्मत एवं टाइल्स का कार्य।

5. परिसर में नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था।

6. जायरीनों के लिए पर्याप्त शुद्ध पेयजल।

7. आधुनिक एवं स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था।

8. भवनों की सुरक्षा और आवश्यक रखरखाव।

9. दरगाह परिसर का व्यवस्थित सौंदर्यीकरण।

10. भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अतिरिक्त भूमि की संभावनाओं पर नियमानुसार कार्रवाई।

बारिश में जायरीनों को परेशानी होना प्रशासन के लिए गंभीर विषय

काठा पीर दरगाह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र की गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक सौहार्द की पहचान भी है। यहां आने वाले जायरीनों को यदि बारिश में टपकती छतों और बदहाल कमरों के बीच रहना पड़े तो यह निश्चित रूप से गंभीर चिंता का विषय है।

प्रशासन को चाहिए कि शिकायतों का इंतजार करने के बजाय बरसात के दौरान स्वयं मौके की स्थिति का निरीक्षण कराकर तत्काल राहत और स्थायी मरम्मत की कार्ययोजना तैयार करे।

जल्द एसडीएम से मुलाकात, समाधान नहीं हुआ तो उच्च स्तर पर उठेगा मामला

मौ. सलीम ने बताया कि दरगाह की समस्याओं को लेकर जल्द ही एसडीएम लक्सर से मुलाकात की जाएगी और उन्हें मौके की स्थिति से अवगत कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि शिकायत के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो मामले को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1905 सहित संबंधित उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष भी प्रशासनिक स्तर पर समस्या के समाधान की मांग रखी जाएगी।

उन्होंने कहा कि काठा पीर दरगाह में आने वाले जायरीनों को बेहतर और सुरक्षित सुविधाएं मिलना जरूरी है। अब आवश्यकता केवल आश्वासन की नहीं, बल्कि धरातल पर तत्काल काम शुरू कराने की है। प्रशासन को बरसात के दौरान टपकती छतों की समस्या को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द समाधान सुनिश्चित करना चाहिए।

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